आज के एपिसोड की शुरुआत में वरुण कहता है कि आप सब सही कह रहे हो, मुझे सजा मिलनी चाहिए। आप पुलिस बुलाइये, मुझे सजा दिलवाइये। वरुण प्रेरणा की जान बचाने के लिए अनुपमा को धन्यवाद करता है और कहता है कि मैं इस बोझ के साथ नही जी पाऊंगा। मुझे सजा दीजिये। वरुण दुखी होकर रोने लग जाता है। प्रेरणा भी कहती है कि उसे पहले से ही पता था कि रजनी इतनी नीचे गिर सकती है और वह रजनी को सज़ा दिए जाने की मांग करती है। भारती कहती है कि मैंने उन्हें दिल से अपनी माँ माना था लेकिन उनका प्यार और अपनापन सिर्फ दिखावा था। उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए। प्रेरणा कहती है कि उन्हें ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि वो दोस्ती में कभी धोखा ना दे। सरिता और जसप्रीत भी सहमत होती है।
राही भी गुस्से में आकर अनुपमा से कहती है कि वह पीछे न हटे और रजनी को सज़ा ज़रूर दिलाए।
दूसरी तरफ रजनी को एक कॉल आता है। वरुण उसे कहता है कि भगवान ने आपके पापो की सजा प्रेरणा को नही दी, प्रेरणा बच गयी है। रजनी को राहत मिलती है। वरुण कहता है कि अनु मासी नही रही, आपने अपनी सहेली जान ले ली। रजनी भगवान को धन्यवाद करती है कि प्रेरणा बच गयी। अनुपमा की मौत का सोचकर रजनी खुश होती है और कहती है कि अब सब ठीक हो जाएगा।
दूसरी तरफ प्रेम को रजनी के जानलेवा हमले के बारे में पता चलता है तो वह भगवान को धन्यवाद करता है। राहि कहती है कि मौत मेरे लिए आई थी लेकिन प्रेरणा ने मेरी जगह ले ली।
राही को रजनी पर बेहद गुस्सा आता है और वह कहती है कि उस घटिया औरत ने मम्मी की जान लेने की कोशिश की है। प्रेम हैरान होता है। राहि बताती है कि ये आग रजनी ने जानबूझकर लगवाई थी। प्रेम कहता है कि वह रजनी को किसी भी हाल में नहीं छोडेगा। राहि कहती है कि रजनी का ऐसा हाल होगा कि वो सोच भी नही सकती।
दूसरी तरफ रजनी सो रही होती है तभी अचानक बिजली कडकने लगती है। रजनी डर जाती है और कहती है कि मुझे इतना डर क्यो लग रहा है? अनुपमा तो मर गयी है, फिर ये सब क्यो हो रहा है?
तभी अनुपमा भूत बनकर उसके सामने आती है और कहती है कि मैं जिंदगी से हारी हूँ, तुमसे नही। अनुपमा को देखकर रजनी बुरी तरह घबरा जाती है। अनुपमा रजनी के पास आती है और कहती है कि मैं वापस लौट आयी हूँ। रजनी पूछती है कि मैंने तो तुम्हे जलाकर मारा है, तुम्हारा दाह संस्कार तो हो गया है, फिर तुम वापस कैसे आ सकती हो? अनुपमा कहती है कि शरीर जल सकता है, लेकिन आत्मा कभी नहीं मरती।
रजनी बेहद डर जाती है और सिक्युरिटी को आवाज लगाती है। अनुपमा पूछती है कि तुमने मुझे क्यो मारा? मैं तो तुम्हारी सहेली थी। तुम्हे मैं अपना मानती थी। क्या तुमने एक बार भी ये नही सोचा कि मैं भी माँ हूँ, मेरा भी परिवार है। तुम्हारी लगाई हुई आग में तुम्हारी बेटी जलने वाली थी। तुम कैसी मा हो, जो अपनी ही बेटी का खून करने चली थी। तभी रजनी कहती है कि मैं बुरी मा नही हूँ, मैं अपने बच्चों से बहुत प्यार करती हूं। अनुपमा कहती है कि अभी तो मैं यहा खडी हु लेकिन अगर प्रेरणा को कुछ हो जाता तो मेरी जगह वो खडी होती। रजनी घबरा जाती है। अनुपमा कहती है कि मेरी ममता ने तुम्हारी बेटी को बचा लिया वरना तुम्हारी बेटी जल गई होती। मुझे मारकर भी तुम जीती नही हो। रजनी कहती है कि मैं जीत गयी हु और अब तुम कुछ नही कर सकती। अनुपमा कहती है कि अब तुम्हारे कर्मो के फल तुम्हारा फैसला करेंगे। अब सबकुछ तुमसे छिन जाएगा। रजनी कहती है कि ऐसा कुछ नही होगा, कोई सबूत नही है कि मैंने तुम्हें मारा था।
अनुपमा पूछती है कि मैंने ऐसा क्या किया था? रजनी कहती है कि पूर्वीछाया चोल मेरा सबसे बडा प्रोजेक्ट था। उससे मुझे इतने पैसे मिलते कि मेरी सात पुश्ते बैठकर खा सकती थी लेकिन तुमने बीच मे आकर सब खराब कर दिया। अनुपमा पूछती है कि क्या इसीलिए तुमने मुझसे झूठ बोलकर वो पेपर्स साइन करवाये? रजनी कहती हैं कि हा, मैंने तुम्हें धोखा दिया। रजनी अपने सारे जुर्म कबूल कर लेती है। अनुपमा कहती है कि तुम्हे ईशानी और परी के पीछे गुंडे भेजने की क्या जरूरत थी? रजनी कहती है कि मैंने वो सब तुम्हे डराने के लिए किया था। लेकिन तुम नही डरी। तुम्हारी जिद ही तुम्हारी मौत की जिम्मेदार है। तुम जिंदा रहती तो मेरे हाथ से ये प्रोजेक्ट निकल जाता, इसलिए मैंने तुम्हें जलाकर मरवा दिया। अनुपमा हैरान होती है।
रजनी खुद से कहती है कि मेरा मन मेरे साथ खेल रहा है। अनुपमा यहा नही है। तभी वह देखती है तो अनुपमा वहां नही होती। रजनी को लगता है कि ये सब उसका वहम था। रजनी अनुपमा की मौत का सोचकर बेहद खुश होती है।
दूसरी तरफ मोटी बा भगवान के सामने बैठी होती है। उसे देखकर पराग कहता है कि बेटा अपनी माँ के आसुंओ का बोझ नही उठा सकता। पराग दुखी होता है और कहता है कि आज मैं हार गया, मैं अपना घर नही बचा पाया। ख्याति कहती है कि आपने संस्कार और परिवार बचा लिए। मुझे आप पर गर्व है। हम सब आपके साथ है, भगवान सब ठीक कर देंगे। पराग कहता है कि एक रात में क्या ही हो जाएगा। प्रेम कहता है कि दुनिया एक पल में बदल जाती है, हमे उम्मीद नही छोडनी चाहिए।
तभी मोटी बा रोने लग जाती है। प्रेम मोटी बा से कहता है कि आप ऐसे कब तक बैठी रहोगी? मोटी बा कहती है कि इंसान सम्मान के लिए जीता है। हम आजतक शान से जीते आये है, अगर शान से जीना सम्भव ना हो तो शान से मर जाना बेहतर होता है। अब श्रीनाथ जी के सामने से हमारी अर्थी ही उठेगी। अनिल रोने लग जाता है। पराग अनिल को सम्भालता है। अनिल कहता है कि सच की हमे बहुत बडी कीमत चुकानी पड रही है।
इधर मोटी बा रोते हुए कहती है कि हम मर जाना चाहते है। प्रेम मोटी बा को डाँटते हुए कहता है कि आज के बाद आप ऐसी बात नही करोगी। वह मोटी बा को भगवान पर भरोसा करने के लिए कहता है। प्रेम कहता है कि अगर श्रीनाथजी ने चाहा तो कल का सूरज हमारे लिए जीत की खबर लाएगा।
दूसरी तरफ चोल में सभी लोग परेशान होते है और कहते है कि हम कहा जायेगे? सभी अनुपमा को दोष देते है। तभी सरिता और बाकी सब आती है। चोल वाले पूछते है कि तुम्हारी महान अनुपमा कहा है? वो हमे बर्बाद करके चली गयी। शायद रजनी से पैसे लेकर भाग गई होगी।
तभी अनुपमा आती है और कहती है कि मुझे सिर्फ आपसे सात घण्टे चाहिए। सुबह मैं सब कुछ ठीक कर दूंगी। तभी चोल वाले अनुपमा को चुप रहने के लिए कहते है और अनुपमा पर गुस्सा करते है। सभी कहते है कि अनुपमा हमे चोल में नही चाहिए। एक औरत गुस्से में अनुपमा को डंडे से पीटने आती है तभी राहि उसे रोकती है।
राहि गुस्से में कहती है कि चुपचाप खडी रहो वरना ऐसा मारूँगी कि चोल गिरने से पहले तुम गिर जाओगी। सभी हैरान होते है।
दूसरी तरफ माही अपने और परी गहने लेकर इकठ्ठा कर लेती है। माही और गौतम फैसला करते है कि वो दोनो किसी की मदद नही करेंगे। गौतम कहता है कि इंदौर में पापा ने एक बंगला लिया था। जिसका उन्हें पता नही है, लेकिन वो बंगला मेरे नाम है। माही खुश होती है। दोनो पैकिंग करने लगते है।
दूसरी तरफ रजनी कहती है कि आत्मा कुछ नही होती, शरीर खत्म हुआ तो किस्सा खत्म हुआ। कल चोल टूट जाएगी, कल मैं जीत जाऊंगी। असली नेता वो होता है जिसे पता हो कि जनता से अपना मुह कब छुपाना है। मैं असली नेता हूँ।
रजनी सोचती है कि वरुण, भारती और प्रेरणा मुझसे नाराज है लेकिन मैं उन्हें मना लुंगी।
दूसरी तरफ चोल वाले अनुपमा को जाने के लिए कहते है। अनुपमा कहती है कि कल ये चोल नही टूटेगी, मैं अपना वादा जरूर निभाउंगी। अगर आपको अपना घर बचाना है तो मेरा साथ दे दीजिए। सरिता कहती है कि अनुपमा के पास एक प्लान है, वो सुन लीजिए। सभी असमंजस में पड जाते है। इसी के साथ एपिसोड खत्म हों जाता है।
अगले एपिसोड में देखने को मिलेगा कि सरिता रजनी से कहती है कि जो जलकर मरते है उनकी आत्मा को चैन नही मिलता। रजनी चोल तोडने लगती है तभी अनुपमा उसे रोकती है। अनुपमा कहती है कि कुर्सी की पावर जनता से होती है। वरना इस कुर्सी की लकडी में और चिता की लकडी में कोई फर्क नही होता।


